धामी की जीत खंडूरी की हार का बदला भी है

धामी की जीत खंडूरी की हार का बदला भी है

चंपावत उपचुनाव में धामी की ऐतिहासिक जीत में न सिर्फ खटीमा उपचुनाव में हुआ भीतरघात का बदला है बल्कि 2012 में कोटद्वार विधानसभा सीट में हुई तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी की हार का भी पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों को करारा तमाचा है।

मैं मुख्यमंत्री बनुंगा और मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने ऊपर वाले नेता को हरवा दुंगा वाली सोच के कारण भाजपा 2012 में मात्र मुख्यमंत्री के हारने की वजह से ही सरकार नहीं बना पाई थी। लेकिन तब भाजपा का हाई कमान अडवाणी और राजनाथ जैसे नेता थे लेकिन अब मोदी शाह की जोड़ी पार्टी के भीतरघातियों को बख्शने वाली तो नहीं लग रही है।
बस यही वजह थी कि पार्टी ने मात्र पार्टी विरोधियों को ही सबक सिखाने के लिए खटीमा चुनाव हारने के बावजूद भी पुष्कर सिंह धामी को पहले मुख्यमंत्री बनाया और फिर उपचुनाव लड़वाकर भारी भरकम जीत से उनकी सीट परमानेंट कर दी।
अब आने वाले समय में पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रचने वालों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की संभावना भी दिख रही है।

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