राज्य का राशन ‘अवैध कब्जाधारी’ खाएंगे

राज्य का राशन ‘अवैध कब्जाधारी’ खाएंगे

खाद्यान्न वितरण की ‘पात्र को हां और अपात्र को न’ वाली योजना का स्वरूप ‘मूल निवासियों को न और अवैध कब्जेधारियों को हां’ जैसी भी दिखाई दे रही है।

अलग राज्य गठन के लिए अपनी जान और अस्मत दांव पर लगाने के बाद आज उत्तराखंड के ये हालात हो गए हैं कि राज्य की राजनीति मैदानी इलाकों पर केंद्रित होने की तरफ बढ़ रही है और ताज्जुब कि मैदानी इलाकों में बड़ते अवैध अतिक्रमणकारी ही राजनीति का स्वरूप तय कर रहे हैं।
वहीं इन इलाकों में सरकारी जमीन नदी नालों में आए दिन बढ़ते अतिक्रमण और बाहरी नेताओं के बढ़ते प्रभाव के कारण राज्य के संसाधनों में अब इन्हीं का अधिकत्तम कब्जा भी हो गया है।
सरकारी स्कूल हो या अस्पताल, कोई भी पेंशन हो या सरकारी योजना अधिकत्तम दूसरे राज्यवासी, जिनका सरकारी सम्पत्तियों पर अवैध कब्जा है, ही अधिकत्तम लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा राज्य की राजनीति में भी इनकी बढ़ती आबादी के कारण पेंठ भी बढ़ती जा रही है।
वहीं सरकार के पात्र को हां और अपात्र को न जैसी योजनाओं का लाभ अवैध कब्जेधारियों को जरूर पात्र बना रहे हैं।
पुलिस के किरायेदारी सत्यापन प्रक्रिया से लेकर रोजमर्रा की अवैध कब्जों की खबरों से भी राज्य सरकार चेत नहीं पा रही है।

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